70+ Best Zia Mazkoor Shayari in Hindi | ज़िया मज़क़ूर शायरी 2026
Zia Mazkoor Shayari हिंदी साहित्य और आधुनिक उर्दू-हिंदी शायरी की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जिसकी रचनाएँ दिल की गहराइयों को छू लेती हैं। उनकी शायरी में प्रेम, दर्द, अकेलापन, सामाजिक सच्चाई और जिंदगी के अनुभवों की झलक साफ दिखाई देती है। Zia Mazkoor की कविताएँ सरल भाषा में होने के बावजूद बेहद प्रभावशाली और भावनात्मक होती हैं, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
इस पोस्ट में आपको Zia Mazkoor की बेहतरीन शायरी का संग्रह मिलेगा, जिसमें उनके मशहूर शेर और ग़ज़लें शामिल हैं, जो सोशल मीडिया और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। अगर आप ऐसी शायरी पढ़ना पसंद करते हैं जो दिल को छू जाए और अंदर तक असर करे, तो Zia Mazkoor Shayari का यह संग्रह आपके लिए ही है।
Zia Mazkoor Shayari

हमसे मिलकर भी वो अजनबी सा रहा
होंठ ख़ामोश, मगर दिल गवाही दे रहा
ज़िया ने समझ लिया उस नज़र का जवाब
उसको मोहब्बत थी मगर इज़हार नहीं कर रहा !!
एक नज़र देखते तो जाओ मुझे
कब कहा है गले लगाओ मुझे
तुमको नुस्खा भी लिख के दे दूंगा
ज़ख्म तो ठीक से दिखाओ मुझे !!
चारागर ऐ चारागर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी
पता नहीं कैसा माहौल था उसके घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी !!
कभी चाँदनी रातों में तेरा नाम लिखा
कभी ख़्वाबों में तेरे होंठों पे सलाम लिखा
ज़िया ने हर लफ़्ज़ को तुझसे जोड़ा यूँ
कि हर शेर में तेरे इश्क़ का पैग़ाम लिखा !!
कोई कहता नहीं था लौट आओ
कि हम पैसे ही इतने भेजते थे
तुम्हारा शुक्रिया ऐ डूबती नाव
कि हम भी तैरना भूले हुए थे !!
Zia Mazkoor Shayari in Hindi

तेरे जाने के बाद सन्नाटा ही मिला
हर हँसी के बदले आहटों का सिलसिला
ज़िया ने जब ढूँढा तुझे भीड़ में कहीं
तो अपना ही साया बस साथ चला !!
अब तो थोड़ा रास्ता बाकी है
इश्क़ का एक किस्सा बाकी है
मंज़िल मिले या ना मिले हमें
चलने का बस जज़्बा बाकी है !!
हर किसी को अपनी कहानी कहनी है
हर ज़ख्म की अपनी निशानी रहनी है
ज़िया कहता है, मत डर दर्द से
इन्हीं में ज़िंदगी की रवानी रहनी है !!
अब बस उसके दिल के अंदर दाखिल होना बाकी है
छह दरवाज़े छोड़ चुका हूं एक दरवाज़ा बाकी है !!
बोल पढ़ते हैं हम जो आगे से
प्यार बढ़ता है इस रवये से
मैं वही हूँ, यकीन करो मेरा
मैं जो लगता नहीं हूँ चेहरे से !!
Ziya Zia Mazkoor Shayari

दिल की गहराइयों में एक सवाल रहता है
हर खुशी के पीछे क्यों मलाल रहता है
ज़िया के शब्दों में छुपा है दर्द-ए-ज़िंदगी
फिर भी हर लफ्ज़ में कमाल रहता है !!
इश्क़ लटका रहेगा पंखे पे
लोग किस्से बनाएंगे रिश्तों के
कभी मोहब्बत का नाम देंगे
कभी इल्ज़ाम लगाएंगे वक्तों के !!
हमने तो चाहा था बस थोड़ा सुकून ज़िंदगी में
मगर हर मोड़ पर इम्तिहान लिखे गए क़िस्मत में
हँसने की कोशिश में आँसू छुपा लिए हमने
लोग कहते हैं "तुम तो बड़े मज़बूत निकले" !!
वो जो कल तक मेरी दुनिया था
आज यादों में एक अफ़साना है
कितनी जल्दी बदल जाते हैं लोग
यह सबक ज़िंदगी ने सिखाया है !!
तुम्हें देख के लगता है खुदा भी हैरान है
इतना सुंदर बनाया, फिर दिमाग़ क्यों परेशान है?
Zia Mazkoor Shayari Book

तेरे बिना अब कोई मंज़िल नहीं लगती
हर राह सूनी, हर ख़ुशी अधूरी लगती
कभी सोचा न था तू इतनी दूर जाएगा
अब तो साँस भी तेरे नाम से जुड़ी लगती !!
दर्द को लफ्ज़ों में ढालना आ गया
टूटे दिल को संभालना आ गया
ज़िया की तरह हमने भी सीख लिया
खामोशी को शायरी बनाना आ गया !!
तेरे लफ़्ज़ों में वो असर था कि दिल ठहर गया
हर जुमले में इक नया अफ़साना उतर गया
जो कहा तूने तो लगा खुदा बोल पड़ा
ज़िया! फिर मोहब्बत का मतलब समझ गया !!
वक्त के साथ सब बदल जाता है
हर रिश्ता कहीं दूर निकल जाता है
ज़िया की शायरी कहती है यही बात
इंसान अकेला ही रह जाता है !!
हवा चली तो उस की शाल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब्ता हुआ !!
Zia Mazkoor Shayari in Urdu

वक़्त ही कम था फ़ैसले के लिए
वर्ना मैं आता मशवरे के लिए
तुम को अच्छे लगे तो तुम रख लो
फूल तोड़े थे बेचने के लिए !!
ख्वाबों की दुनिया में खोया सा रहता हूँ
हर रात तन्हाई में रोया सा रहता हूँ
ज़िया की शायरी सिखाती है जीना मुझे
वरना मैं तो खुद से भी खोया सा रहता हूँ !!
रिश्तों की भीड़ में अकेलापन मिलता है
हर अपने में एक अजनबी मिलता है
ज़िया की शायरी यही सिखाती है
यहाँ हर किसी में दर्द मिलता है !!
लोग हमारी तारीफ़ में जो रोशनी (ज़िया) करते हैं
उसी का मज़क़ूर (ज़िक्र) करके हमें नीचे उतार लेंगे !!
ज़िया-ए-मज़क़ूर पे इतरा रहे थे हम
अब वही लोग हमें नीचे उतार लेंगे !!
Zia Mazkoor Shayari Hindi

तुम ने भी उन से ही मिलना होता है
जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है
तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो
ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है !!
बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उसने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उसने !!
हर ख्वाब अधूरा सा रह जाता है
हर सफर थका सा रह जाता है
ज़िया के अल्फाज़ बताते हैं ये सच
इंसान बस जिया सा रह जाता है !!
हमने तो दर्द को अपना बना लिया
खामोशी को ही ज़ुबान बना लिया
ज़िया की शायरी ने ये एहसास दिया
टूट कर भी मुस्कुराना आ गया !!
तेरे दीदार की प्यास रोज़ बढ़ती जाती है
दिल की धड़कन बस तेरा नाम गुनगुनाती है !!
